लेकिन अल्लाह तआ़ला के यहां उसका यह मक़ाम है

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             *बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम*
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*📚हदीस:*  *हज़रत सौबान  रज़ीयल्लाहु अन्हु रिवायत करते है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया: मेरी उम्मत में कुछ लोग ऐसे है कि उनमें से कोई शख़्स तुममें से किसी के पास आए और दीनार मांगे तो वह उसको न दे, अगर एक दिरहम मांगे तो वह भी न दे और अगर एक पैसा मांगे तो वह उसको एक पैसा तक न दे (लेकिन अल्लाह तआ़ला के यहां उसका यह मक़ाम है कि) अगर वह अल्लाह तआ़ला से जन्न्त मांग ले तो अल्लाह तआ़ला उसको जन्न्त दे दे | (उस शख़्स के बदन पर सिर्फ़) दो पुरानी चादरें हों, उसकी बिल्कुल परवाह न की जाती हो (लेकिन) अगर वह अल्लाह तआ़ला (के भरोसे) पर क़सम खा बैठे तो अल्लाह तआ़ला ज़रूर उसकी क़सम को पूरा कर दे;*

              *📗 (तबरानी मज्मउज़्ज़वाइद)*

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