बीमारियां और हादसे
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*बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिर्रहीम*
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*📚हदीस:* *हज़रत अ़ब्दुल्लाह रज़ीयल्लाहु अ़न्हु फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा रसलुल्लाह ﷺ ने मुरब्बअ् (चार लकीरों वाली) शक्ल बनाई फिर इस मुरब्बअ् शक्ल में एक दूसरी लकीर खींची, जो इस मुरब्बअ् से बाहर निकल गई फिर उस मुरब्बअ् शक्ल के अन्दर छोटी-छोटी लकीरें बनाई जिसकी सूरत उलमा ने मुख़्तलिफ़ लिखी है जिनमें से एक यह है;*
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*इसके बाद नबी करीम ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया: यह दर्मियानी लकीर तो आदमी है और जो (मुरब्बअ् यानी चतुर्भुज वाली लकीर है) उसको चारों तरफ़ से घेर रही है वह उसकी मौत है कि आदमी उससे निकल ही नहीं सकता,जो लकीर बाहर निकल रही है वे उसकी उम्मीदें है कि ये उसकी ज़िन्दगी से भी आगे हैं और ये छोटी-छोटी लकीर उसकी बीमारियां और हादसे है हर छोटी लकीर एक आफ़त है अगर एक से बच जाए तो दूसरी पकड़ लेती है और अगर उससे जान छूट जाए तो दूसरी कोई आफ़त आ पड़ती है;*
*(📒बुख़ारी)*
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